नई मजदूरी संहिता श्रृंखला - पैलो दिन

नयो मजदूरी संहिता भारत रै मांय नियोक्तावां, एच.आर. पेशेवरों, पेरोल टीमां अर कर्मचारियां रै बीच सबसूं ज्यादा चर्चा रो विषय बण गयो है।

पण अठै घणी भ्रम भी है।

कांई मूल वेतन सी.टी.सी. रो 50% बण जावैला? कांई घरां ले जावण री तनखा कम हुय जावैला? विल पी.एफ. बढत? भत्ते रो कांई होसी? कांई हरेक कंपनी नै आपरी वेतन संरचना नै बदलणी पड़ैला?

इण सवालां माथै जावण सूं पैली, आपां नै पैली मूल बातां नै समझणी पड़सी।

भारत रै मांय नूंवी मजदूरी संहिता नै समझण रै वास्तै अठै 10 सरल बिंदु है।

### 1. भारत ने चार नई श्रम संहिता लागू की है

भारत री श्रम कानून प्रणाली मांय पैली केई न्यारा-न्यारा केन्द्रीय श्रम कानून हा। सरकार ने 29 केन्द्रीय श्रम कानूनों को चार प्रमुख श्रम संहिताओं में समेकित किया है।

ये चार संहिता मोटा तौर माथै मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक संबंध अर कार्यस्थल री सुरक्षा अर काम री स्थिति सूं संबंधित है।

विचार सरल है: कम अलग-अलग कानून अर एक ज्यादा संगठित श्रम अनुपालन प्रणाली।

### 2. मजदूरी संहिता एकमात्र श्रम संहिता कोनी है

घणकरा लोग लापरवाही सूं श्रम कानून सुधार रै वास्तै “नई मजदूरी संहिता” शब्द रो प्रयोग करै है।

तकनीकी रूप सूं, मजदूरी संहिता, 2019 चार श्रम संहितावां मांय सूं एक है।

बाकी तीन संहिता सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक संबंध अर व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य अर काम करण री स्थिति सूं संबंधित है।

एच.आर. अर पेरोल पेशेवरों रै वास्तै, चारों कोड महत्वपूर्ण है क्यूंकै कर्मचारी प्रबंधन सिर्फ वेतन गणना तक सीमित कोनी है।

### 3. “मजदूरी” रो अरथ घणो जरूरी होग्यो है

सबसूं बडो बदलाव मांय सूं एक है मजदूरी री आम परिभाषा।

मजदूरी संहिता रै तहत, मूल वेतन, महंगाई भत्ता अर रिटेनिंग भत्ता, जे कोई है, तो मजदूरी रै मांय शामिल है।

शर्तां रै अधीन, केई दूजा भुगतान अर भत्ता बाहर राख्या गया है।

आ परिभाषा इण वास्तै महताऊ है क्यूंकै केई कर्मचारी लाभ अर वेतन गणना मजदूरी सूं जुड़ी हुय सकै है।

### 4. मूल वेतन अर मजदूरी बिल्कुल एक जैड़ी कोनी है

आ एक घणी आम गलतफहमी है।

घणकरा लोग कैवे है:

“नई मजदूरी संहिता रै तहत, मूल वेतन सी.टी.सी. रो 50% होणो जरूरी है।”

यो कथन तकनीकी रूप सूं कानून नै समझबा रो सही तरीको कोनी है।

संहिता मजदूरी री परिभाषा अर बहिष्कृत घटकां री सीमा रै बारै में बात करै है।

मूल वेतन मजदूरी रो एक महताऊ हिस्सो है, पण मूल वेतन अर मजदूरी नै आपोआप एक ई अवधि रै रूप मांय नीं मानणो चाइजै।

वेतन संरचना नै डिजाइन करतां बगत ओ छोटो सो फरक एक मोटो असर पैदा कर सकै है।

### 5. 50% नियम नै ठीक सूं समझणो जरूरी है

यो शायद नई मजदूरी संहिता रो सबसूं ज्यादा चर्चा रो हिस्सो है।

जे मजदूरी सूं बारै राखीज्योड़ा भुगतान अर भत्ता कुल पारिश्रमिक रै 50% सूं बेसी हुवै, या अैड़ो प्रतिशत जिणनै अधिसूचित करियो जा सकै, तो अतिरिक्त रकम नै मजदूरी मांय पाछी जोड़ दी जावै।

साधारण सबदां मांय कैवां तो कोई कंपनी मजदूरी री परिभाषा माथै विचार किये बिना मजदूरी रो हिस्सो घणो कम नीं राख सकै अर मजदूरी री परिभाषा माथै विचार किये बिना घणकरी वेतन नै न्यारा-न्यारा भत्ता नामां रै तळै नीं राख सकै।

इण वास्तै, लोकप्रिय “50% नियम” असल मांय मजदूरी री गणना अर परिभाषा सूं जुड़्योड़ो है।

### 6. भत्ते नै न्यारो नाम देबा सूं समस्या रो समाधान कोनी हो सकै

पैली, वेतन संरचनावां रै मांय कई घटक हुया करता हा:

मूल वेतन।
एच.आर.ए.
विशेष भत्ता।
परिवहन भत्ता।
दूजा भत्ता।
लचीला भत्ता।

नूंवै मजदूरी ढांचे रै तहत, फगत कई भत्ता शीर्षक बणाबा सूं मजदूरी मूल्य कम नीं हो सकै।

वेतन पेशेवरों नै भुगतान री प्रकृति नै समझणी पड़सी, न केवल वेतन घटक नै दियो गयो नाम।

एक रचनात्मक एक्सेल वेतन संरचना सही कानूनी समझ री जगां नीं ले सकै।

### 7. पी.एफ. अर अनुग्रह री गणना प्रभावित हो सकै है

मजदूरी री परिभाषा रो श्रम संहिता रै तहत वैधानिक अर कर्मचारी लाभ री गणना माथै असर पड़ सकै है।

इणी वास्तै नियोक्ता पी.एफ., ग्रेच्युटी अर समग्र कर्मचारी लागत रै बारै में चिंतित है।

हालांकि, यो मानणो गलत है कै हर कर्मचारी रो पी.एफ. आपोआप दोगुणो हो जावैला या फेर हरेक कंपनी री वेतन लागत तुरंत उणी प्रतिशत सूं बढ़ जावैला।

वास्तविक प्रभाव मौजूदा वेतन संरचना, कर्मचारी श्रेणी अर लागू वैधानिक प्रावधानां माथै निर्भर करैला।

### 8. केई कर्मचारियां री टेक-होम सैलरी बदळ सकै है

जे मजदूरी री संरचना बदळ जावै अर वैधानिक योगदान बढ़ जावै तो कर्मचारी री मासिक टेक-होम वेतन प्रभावित हो सकै है।

उदाहरण रै वास्तै, एक कर्मचारी नै थोड़ा कम धन मिल सकै है पण दीर्घकालिक लाभां रै वास्तै जाबा आळी ज्यादा रकम हो सकै है।

पण फेर भी, हरेक कर्मचारी माथै लागू कोई एक सूत्र कोनी है।

पैली मौजूदा वेतन संरचना री जांच करणी जरूरी है।

### 9. नियोक्ता नै वेतन संरचनावां री समीक्षा करणी चाइजै, घबराणो नीं चाइजै

नूंवै मजदूरी संहिता रो ओ मतलब कोनी कै हरेक नियोक्ता नै बिना गणना रै हरेक वेतन घटक नै तुरंत बदलणो चाइजै।

सही तरीको है:

मौजूदा वेतन संरचना री समीक्षा करो, मजदूरी घटकां नै समझो, बहिष्कृत भत्ते री जांच करो, 50% सीमा री गणना करो अर वैधानिक लाभां अर नियोक्ता लागत माथै पड़ण आळा प्रभाव रो अध्ययन करो।

पैली समीक्षा करो। दूजी गणना करो। तीजो पुनर्गठन करो।

वित्तीय प्रभाव नै समझे बिना वेतन संरचनावां नै बदलणो बाद रै मांय वेतन संबंधी समस्यावां पैदा कर सकै है।

### 10. पेरोल सॉफ्टवेयर नै कानून नै समझणो पड़सी, न सिर्फ वेतन री गणना करणी पड़सी

आधुनिक पेरोल अबै हाजरी दर्ज करणो अर “प्रोसेस सैलरी” बटण माथै क्लिक करणो कोनी है।

एक पेरोल प्रणाली नै वेतन घटक, मजदूरी उपचार, वैधानिक प्रयोज्यता, योगदान नियम अर अनुपालन प्रभाव नै समझण री जरूरत है।

नयो मजदूरी संहिता सही वेतन विन्यास नै और भी जरूरी बणा देवै है।

कई एक्सेल शीट रै माध्यम सूं जटिल पेरोल रो प्रबंधन करण आळा कारोबारियां रै वास्तै, आ पूरी पेरोल प्रक्रिया री समीक्षा करण रो सही बगत हो सकै है।

## आखरी विचार

नयो मजदूरी संहिता पैली तो जटिल लाग सकै है, पण मूल विचार कठिन कोनी है।

सबसूं जरूरी बात आ है कै वेतन, सी.टी.सी., बेसिक पे अर मजदूरी रै बिचाळै रो फरक समझणो है।

जद ये च्यार अवधारणावां साफ हो जावै है, तो 50% नियम अर इणरै वेतन प्रभाव नै समझणो घणो सोरो हो जावै है।

म्हारी नई मजदूरी संहिता श्रृंखला रै दूजै दिन मांय, आपां बतास्यां: “वेतन, सी.टी.सी., मूल वेतन अर मजदूरी – कांई वै साची में एक ई है?”

यो लेख पेसिम्प्लिफाइड न्यू वेज कोड लर्निंग सीरीज रो हिस्सो है, जिणनै भारतीय पेरोल अर श्रम अनुपालन अवधारणावां नै सरल अर व्यावहारिक भाषा में समझावण रै वास्तै बणायो गयो है।